श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 40: पञ्चचूड़ा अप्सराका नारदजीसे स्त्रियोंके दोषोंका वर्णन करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  13.40.10 
इत्युक्ता सा कृतमतिरभवच्चारुहासिनी।
स्त्रीदोषान् शाश्वतान् सत्यान् भाषितुं सम्प्रचक्रमे॥ १०॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार समझाने पर वह दिव्य अप्सरा मनमोहक मुस्कान के साथ बोलने के लिए उद्यत हुई और स्त्रियों के वास्तविक एवं स्वाभाविक दोषों को बताने लगी॥10॥
 
After being explained in this manner, the celestial nymph with a charming smile became determined to speak and began to tell about the true and natural faults of women.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)