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श्लोक 13.4.62  |
यत्र यत्र च संदेहो भूयस्ते राजसत्तम।
तत्र तत्र च मां ब्रूहि च्छेत्तास्मि तव संशयम्॥ ६२॥ |
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| अनुवाद |
| हे राजनश्रेष्ठ! अब तुम्हें जहाँ कहीं भी कोई संदेह हो, मुझसे पूछो। मैं तुम्हारा संदेह दूर कर दूँगा। |
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| O best of kings! Now wherever you have any doubts, ask me about them. I will clear your doubts. |
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इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि विश्वामित्रोपाख्याने चतुर्थोऽध्याय:॥ ४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें विश्वामित्रका उपाख्यानविषयक चौथा अध्याय पूरा हुआ॥ ४॥
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