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mahabharat 13.4.60-61h: हे राजा युधिष्ठिर! यद्यपि महातपस्वी विश्वामित्र क्षत्रिय थे, तथापि ऋचीक ऋषि ने उनमें परम दिव्य शक्ति का संचार किया था।   |   mahabharat अध्याय 13.4: आजमीढके वंशका वर्णन तथा विश्वामित्रके जन्मकी कथा और उनके पुत्रोंके नाम   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 4: आजमीढके वंशका वर्णन तथा विश्वामित्रके जन्मकी कथा और उनके पुत्रोंके नाम  »  श्लोक 60-61h
 
 
श्लोक  13.4.60-61h 
तथैव क्षत्रियो राजन् विश्वामित्रो महातपा:॥ ६०॥
ऋचीकेनाहितं ब्रह्म परमेतद् युधिष्ठिर।
 
 
अनुवाद
हे राजा युधिष्ठिर! यद्यपि महातपस्वी विश्वामित्र क्षत्रिय थे, तथापि ऋचीक ऋषि ने उनमें परम दिव्य शक्ति का संचार किया था।
 
O King Yudhishthira! Though the great ascetic Visvamitra was a Kshatriya, yet the sage Richika had infused the supreme divine energy into him. 60 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)