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श्लोक 13.4.36  |
दृष्ट्वा गर्भमनुप्राप्तां भार्यां स च महानृषि:।
उवाच तां सत्यवतीं दुर्मना भृगुसत्तम:॥ ३६॥ |
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| अनुवाद |
| अपनी पत्नी सत्यवती को गर्भवती देखकर भृगुश्रेष्ठ महर्षि ऋचीक दुःखी हो गये। |
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| Seeing his wife Satyavati pregnant, Bhrigu's best Maharishi Richik became sad. |
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