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mahabharat 13.4.34: सुमध्यमे! इसीलिए मुझे आपके लिए रखे गए अन्न और वृक्ष में रुचि हो गई है। आप भी यही सोचें कि मेरा भाई किसी प्रकार उत्तम गुणों से युक्त हो जाए।॥34॥   |   mahabharat अध्याय 13.4: आजमीढके वंशका वर्णन तथा विश्वामित्रके जन्मकी कथा और उनके पुत्रोंके नाम   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 4: आजमीढके वंशका वर्णन तथा विश्वामित्रके जन्मकी कथा और उनके पुत्रोंके नाम  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  13.4.34 
ततो मे त्वच्चरौ भाव: पादपे च सुमध्यमे।
कथं विशिष्टो भ्राता मे भवेदित्येव चिन्तय॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
सुमध्यमे! इसीलिए मुझे आपके लिए रखे गए अन्न और वृक्ष में रुचि हो गई है। आप भी यही सोचें कि मेरा भाई किसी प्रकार उत्तम गुणों से युक्त हो जाए।॥34॥
 
‘Sumadhyame! That is why I have developed a liking for the food and the tree which have been kept for you. You should also think that my brother may be blessed with the best qualities in some way.'॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)