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mahabharat 13.4.28: पवित्र हँसती हुई देवी! मैंने ये दो मन्त्रपूत चरु तैयार किए हैं। इनमें से एक तुम खाओ और दूसरा तुम्हारी माता खाए। इससे तुम दोनों को पुत्र प्राप्त होंगे। 28॥   |   mahabharat अध्याय 13.4: आजमीढके वंशका वर्णन तथा विश्वामित्रके जन्मकी कथा और उनके पुत्रोंके नाम   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 4: आजमीढके वंशका वर्णन तथा विश्वामित्रके जन्मकी कथा और उनके पुत्रोंके नाम  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  13.4.28 
चरुद्वयमिदं चैव मन्त्रपूतं शुचिस्मिते।
त्वं च सा चोपभुञ्जीतं तत: पुत्राववाप्स्यथ:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
पवित्र हँसती हुई देवी! मैंने ये दो मन्त्रपूत चरु तैयार किए हैं। इनमें से एक तुम खाओ और दूसरा तुम्हारी माता खाए। इससे तुम दोनों को पुत्र प्राप्त होंगे। 28॥
 
Holy smiling goddess! I have prepared these two mantraput charus. You eat one of these and your mother eats the other. With this both of you will get sons. 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)