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mahabharat 13.4.20: महर्षि ऋचीक ने विधिपूर्वक उसका विवाह कर दिया। वह कन्या भी ऐसे तेजस्वी पति को पाकर बहुत प्रसन्न हुई।   |   mahabharat अध्याय 13.4: आजमीढके वंशका वर्णन तथा विश्वामित्रके जन्मकी कथा और उनके पुत्रोंके नाम   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.4.20 
जग्राह विधिवत् पाणिं तस्या ब्रह्मर्षिसत्तम:।
सा च तं पतिमासाद्य परं हर्षमवाप ह॥ २०॥
 
 
अनुवाद
महर्षि ऋचीक ने विधिपूर्वक उसका विवाह कर दिया। वह कन्या भी ऐसे तेजस्वी पति को पाकर बहुत प्रसन्न हुई।
 
The great sage Richik married her in a proper ceremony. The girl was also very happy to have such a splendid husband.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)