श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 39: दानपात्रकी परीक्षा  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  13.39.6 
भीष्म उवाच
ऋत्विक् पुरोहिताचार्या: शिष्यसम्बन्धिबान्धवा:।
सर्वे पूज्याश्च मान्याश्च श्रुतवन्तोऽनसूयका:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी बोले - बेटा! ऋत्विक, पुरोहित, आचार्य, शिष्य, स्वजन, सम्बन्धी, विद्वान् और दोषरहित पुरुष - ये सभी पूजनीय और आदरणीय हैं॥6॥
 
Bhishmaji said – Son! Ritwik, priest, acharya, disciple, relatives, relatives, scholars and men without any flaw - all of them are worshipable and respectable. 6॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd