श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 39: दानपात्रकी परीक्षा  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  13.39.10 
तथा चिरोषितं चापि सम्प्रत्यागतमेव च।
अपूर्वं चैव पूर्वं च तत्पात्रं मानमर्हति॥ १०॥
 
 
अनुवाद
जो व्यक्ति बहुत समय तक उसके पास रहा हो और जो अभी-अभी कहीं से आया हो, चाहे वह परिचित हो या अपरिचित, वह उपहार और सम्मान पाने का पात्र है ॥10॥
 
The person who has stayed with him for a long time and who has just arrived from somewhere, whether he is an acquaintance or a stranger, he is worthy of receiving gifts and respect. ॥10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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