श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 39: दानपात्रकी परीक्षा  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.39.1 
युधिष्ठिर उवाच
अपूर्वश्च भवेत् पात्रमथवापि चिरोषित:।
दूरादभ्यागतं चापि किं पात्रं स्यात् पितामह॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - पितामह! दान का पात्र कौन है? कोई अपरिचित व्यक्ति या वह व्यक्ति जो बहुत समय से आपके यहाँ रह रहा हो। या वह व्यक्ति जो दूर देश से आया हो? इनमें से दान का सर्वश्रेष्ठ पात्र किसे माना जाना चाहिए?॥1॥
 
Yudhishthira asked - Grandfather! Who is the deserving of donations? An unknown person or a person who has stayed with you for a long time. Or a person who has come from a faraway land? Who among these should be considered the best deserving of donations?॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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