अभिमान: श्रियं हन्ति पुरुषस्याल्पमेधस:।
गर्भेण दुष्यते कन्या गृहवासेन च द्विज:॥ १७॥
अनुवाद
मंदबुद्धि पुरुष में जो अभिमान रहता है, वह उसके धन का नाश कर देता है। कन्या गर्भाधान से अपवित्र हो जाती है और ब्राह्मण सदैव घर में रहने से अपवित्र माना जाता है।॥17॥
The pride that resides in a dull-witted man destroys his wealth. A girl becomes impure on conception and a Brahmin is considered impure on staying at home forever.॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥