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mahabharat 13.37.8: ‘स्वधर्म का पालन करने से धन, बुद्धि, तेज और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है तथा स्वाध्याय का महान् महत्व प्राप्त होता है।॥8॥   |   mahabharat अध्याय 13.37: ब्रह्माजीके द्वारा ब्राह्मणोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 37: ब्रह्माजीके द्वारा ब्राह्मणोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  13.37.8 
श्रीश्च बुद्धिश्च तेजश्च विभूतिश्च प्रतापिनी।
स्वाध्याये चैव माहात्म्यं विपुलं प्रतिपत्स्यते॥ ८॥
 
 
अनुवाद
‘स्वधर्म का पालन करने से धन, बुद्धि, तेज और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है तथा स्वाध्याय का महान् महत्व प्राप्त होता है।॥8॥
 
‘By following one's own religion one obtains wealth, wisdom, brilliance and splendor, and the great significance of self-study is attained.॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)