Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.37.23: हे भोले राजन! दान लेने से ब्राह्मणों का तेज क्षीण हो जाता है; अतः जो ब्राह्मण दान लेना नहीं चाहते, उनसे आप अपने कुल की रक्षा करें॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 13.37: ब्रह्माजीके द्वारा ब्राह्मणोंकी महत्ताका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 37: ब्रह्माजीके द्वारा ब्राह्मणोंकी महत्ताका वर्णन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  13.37.23 
प्रतिग्रहेण तेजो हि विप्राणां शाम्यतेऽनघ।
प्रतिग्रहं ये नेच्छेयुस्तेभ्यो रक्ष्यं त्वया नृप॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे भोले राजन! दान लेने से ब्राह्मणों का तेज क्षीण हो जाता है; अतः जो ब्राह्मण दान लेना नहीं चाहते, उनसे आप अपने कुल की रक्षा करें॥ 23॥
 
O innocent king! By accepting gifts, the glory of Brahmins is diminished; therefore you should protect your clan from those Brahmins who do not wish to accept gifts.॥ 23॥
 
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि ब्राह्मणप्रशंसायां पञ्चत्रिंशोऽध्याय:॥ ३५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें ब्राह्मणकी प्रशंसाविषयक

पैंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३५॥ (दाक्षिणात्य अधिक पाठके दो श्लोक मिलाकर कुल २५ श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)