Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.36.9-10h: इसी प्रकार वे यजमान भी प्रसन्न होते हैं जिनके तर्पण का उपयोग ब्राह्मण करते हैं। वे मृत्यु के बाद नष्ट नहीं होते, उत्तम गति को प्राप्त होते हैं। ॥9 1/2॥ | mahabharat अध्याय 13.36: श्रेष्ठ ब्राह्मणोंकी प्रशंसा । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तथैव तेऽपि प्रीयन्ते येषां भवति तद्धवि:॥ ९॥
न च प्रेत्य विनश्यन्ति गच्छन्ति च परां गतिम्।
अनुवाद
इसी प्रकार वे यजमान भी प्रसन्न होते हैं जिनके तर्पण का उपयोग ब्राह्मण करते हैं। वे मृत्यु के बाद नष्ट नहीं होते, उत्तम गति को प्राप्त होते हैं। ॥9 1/2॥
Similarly, those Yajamanas are also pleased whose offerings are used by Brahmins. They do not perish after death, they attain the best state. ॥9 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥