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mahabharat 13.36.18: यद्यपि क्षत्रियों के पास अनेक प्रकार के विचित्र अस्त्र-शस्त्र थे, फिर भी काले मृगचर्मधारी इन ब्राह्मणों ने उन्हें परास्त कर दिया। क्षत्रियों को ब्राह्मणों को जल से भरा घड़ा दान करके दिव्य कार्य आरम्भ करना चाहिए। 18॥   |   mahabharat अध्याय 13.36: श्रेष्ठ ब्राह्मणोंकी प्रशंसा   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 36: श्रेष्ठ ब्राह्मणोंकी प्रशंसा  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  13.36.18 
चित्रायुधांश्चाप्यजयन्नेते कृष्णाजिनध्वजा:।
प्रक्षिप्याथ च कुम्भान् वै पारगामिनमारभेत्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि क्षत्रियों के पास अनेक प्रकार के विचित्र अस्त्र-शस्त्र थे, फिर भी काले मृगचर्मधारी इन ब्राह्मणों ने उन्हें परास्त कर दिया। क्षत्रियों को ब्राह्मणों को जल से भरा घड़ा दान करके दिव्य कार्य आरम्भ करना चाहिए। 18॥
 
Even though the Kshatriyas had many types of strange weapons, these Brahmins wearing black deer skin defeated them. Kshatriyas should start transcendental work by donating a pot full of water to Brahmins. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)