Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.35.d1h-11: कुछ हठीले होते हैं और कुछ रुई के समान कोमल। इनमें श्रेष्ठ का आदर करना चाहिए; परन्तु जो श्रेष्ठ नहीं हैं, उनकी निन्दा नहीं करनी चाहिए। इन ब्राह्मणों में कोई तो बहुत दुष्ट हैं और कोई महान तपस्वी हैं ॥11॥ | mahabharat अध्याय 13.35: ब्राह्मणके महत्त्वका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रसह्यकारिण: केचित् कार्पासमृदवो परे।
(मान्यास्तेषां साधवो ये न निन्द्याश्चाप्यसाधव:।)
सन्ति चैषामतिशठास्तथैवान्ये तपस्विन:॥ ११॥
अनुवाद
कुछ हठीले होते हैं और कुछ रुई के समान कोमल। इनमें श्रेष्ठ का आदर करना चाहिए; परन्तु जो श्रेष्ठ नहीं हैं, उनकी निन्दा नहीं करनी चाहिए। इन ब्राह्मणों में कोई तो बहुत दुष्ट हैं और कोई महान तपस्वी हैं ॥11॥
Some are stubborn and some are soft like cotton. The best among them should be respected; but those who are not the best should not be criticized. Among these Brahmins, some are very wicked and others are great ascetics. ॥11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥