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mahabharat 13.35.5: राजा को चाहिए कि वह इन ब्राह्मणों की उसी प्रकार रक्षा करे, जिस प्रकार वह अपनी तथा अपने पुत्रों की रक्षा करता है। यही राजा का मुख्य कर्तव्य है, उसे सदैव इस पर दृष्टि रखनी चाहिए ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 13.35: ब्राह्मणके महत्त्वका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 35: ब्राह्मणके महत्त्वका वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  13.35.5 
एतत् कृत्यतमं राज्ञो नित्यमेवोपलक्षयेत्।
यथाऽऽत्मानं यथा पुत्रांस्तथैतान् प्रतिपालयेत्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
राजा को चाहिए कि वह इन ब्राह्मणों की उसी प्रकार रक्षा करे, जिस प्रकार वह अपनी तथा अपने पुत्रों की रक्षा करता है। यही राजा का मुख्य कर्तव्य है, उसे सदैव इस पर दृष्टि रखनी चाहिए ॥5॥
 
The king should protect these brahmins in the same way as he protects himself and his sons. This is the king's main duty; he should always keep an eye on it. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)