श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 35: ब्राह्मणके महत्त्वका वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  13.35.16 
नैते देवैर्न पितृभिर्न गन्धर्वैर्न राक्षसै:।
नासुरैर्न पिशाचैश्च शक्या जेतुं द्विजातय:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
इन द्विजों को न तो देवता जीत सकते हैं, न पितर, न गन्धर्व, न राक्षस, न असुर और न भूतगण ही जीत सकते हैं ॥16॥
 
These Dwijas can neither be conquered by the gods, nor by the Pitris, nor by the Gandharvas, nor by the devils, nor by the Asuras, nor by the ghosts. ॥16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)