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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 34: राजर्षि वृषदर्भ (या उशीनर)-के द्वारा शरणागत कपोतकी रक्षा तथा उस पुण्यके प्रभावसे अक्षयलोककी प्राप्ति
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श्लोक 8
श्लोक
13.34.8
मत्सकाशमनुप्राप्तं न त्वां कश्चित् समुत्सहेत्।
मनसा ग्रहणं कर्तुं रक्षाध्यक्षपुरस्कृतम्॥ ८॥
अनुवाद
अब तुम मेरे पास आये हो, अतः रक्षा-प्रमुख के सामने हो। यहाँ कोई तुम्हें जान-बूझकर भी पकड़ने का साहस नहीं कर सकता।
‘Now you have come to me; hence you are in front of the Chief of Defence. Here no one can dare to catch you even by intention. 8.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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