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जो मनुष्य राजा वृषदर्भ (उशीनर) की कथा को सदैव सुनता और सुनाता है, वह संसार में पुण्यात्मा हो जाता है।
He who always listens to and narrates the story of King Vrishadharbha (Ushinar) becomes a virtuous soul in the world.
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि श्येनकपोतसंवादे द्वात्रिंशोऽध्याय:॥ ३२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें बाज और कबूतरका संवादविषयक बत्तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३२॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥