श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 34: राजर्षि वृषदर्भ (या उशीनर)-के द्वारा शरणागत कपोतकी रक्षा तथा उस पुण्यके प्रभावसे अक्षयलोककी प्राप्ति  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  13.34.39 
इदं वृत्तं हि राजर्षेर्वृषदर्भस्य कीर्तयन्।
पूतात्मा वै भवेत् लोके शृणुयाद् यश्च नित्यश:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य राजा वृषदर्भ (उशीनर) की कथा को सदैव सुनता और सुनाता है, वह संसार में पुण्यात्मा हो जाता है।
 
He who always listens to and narrates the story of King Vrishadharbha (Ushinar) becomes a virtuous soul in the world.
 
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि श्येनकपोतसंवादे द्वात्रिंशोऽध्याय:॥ ३२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें बाज और कबूतरका संवादविषयक बत्तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ३२॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)