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mahabharat 13.34.38: हे भरतश्रेष्ठ! यदि कोई अन्य पुरुष शरणागत पुरुष की इस प्रकार रक्षा करेगा, तो वह भी उसी गति को प्राप्त होगा।   |   mahabharat अध्याय 13.34: राजर्षि वृषदर्भ (या उशीनर)-के द्वारा शरणागत कपोतकी रक्षा तथा उस पुण्यके प्रभावसे अक्षयलोककी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 34: राजर्षि वृषदर्भ (या उशीनर)-के द्वारा शरणागत कपोतकी रक्षा तथा उस पुण्यके प्रभावसे अक्षयलोककी प्राप्ति  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  13.34.38 
योऽप्यन्य: कारयेदेवं शरणागतरक्षणम्।
सोऽपि गच्छेत तामेव गतिं भरतसत्तम॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! यदि कोई अन्य पुरुष शरणागत पुरुष की इस प्रकार रक्षा करेगा, तो वह भी उसी गति को प्राप्त होगा।
 
O best of the Bharatas! If any other man protects a surrendered person in this manner, he too will achieve the same fate. 38.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)