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mahabharat 13.34.37: वीर, धैर्यवान और शुद्ध हृदय वाले काशीनरेश राजर्षि उशीनर अपने पुण्यकर्मों के कारण तीनों लोकों में विख्यात हो गए ॥37॥   |   mahabharat अध्याय 13.34: राजर्षि वृषदर्भ (या उशीनर)-के द्वारा शरणागत कपोतकी रक्षा तथा उस पुण्यके प्रभावसे अक्षयलोककी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.34.37 
स राजर्षिर्विशुद्धात्मा धीर: सत्यपराक्रम:।
काशीनामीश्वर: ख्यातस्त्रिषु लोकेषु कर्मणा॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
वीर, धैर्यवान और शुद्ध हृदय वाले काशीनरेश राजर्षि उशीनर अपने पुण्यकर्मों के कारण तीनों लोकों में विख्यात हो गए ॥37॥
 
Rajarshi Ushinar, the king of Kashin, who was brave, patient and pure in heart, became famous in all the three worlds due to his virtuous deeds. 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)