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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 34: राजर्षि वृषदर्भ (या उशीनर)-के द्वारा शरणागत कपोतकी रक्षा तथा उस पुण्यके प्रभावसे अक्षयलोककी प्राप्ति
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श्लोक 34h
श्लोक
13.34.34h
स राजर्षिर्गत: स्वर्गं कर्मणा तेन शाश्वतम्।
अनुवाद
राजर्षि उशीनर उस विमान में बैठकर उस पुण्य के प्रभाव से सनातन दिव्य लोक को प्राप्त हुए ॥33 1/2॥
Rajarshi Ushinar sat in that plane and reached the eternal divine world due to the influence of that good deed. 33 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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