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mahabharat 13.34.32: देवताओं, गन्धर्वों और अप्सराओं के समूह उन्हें चारों ओर से घेरकर नाचने-गाने लगे। उनके बीच वे ब्रह्मा के समान प्रतीत हो रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 13.34: राजर्षि वृषदर्भ (या उशीनर)-के द्वारा शरणागत कपोतकी रक्षा तथा उस पुण्यके प्रभावसे अक्षयलोककी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.34.32 
देवगन्धर्वसंघातैरप्सरोभिश्च सर्वत:।
नृत्तश्चैवोपगीतश्च पितामह इव प्रभु:॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
देवताओं, गन्धर्वों और अप्सराओं के समूह उन्हें चारों ओर से घेरकर नाचने-गाने लगे। उनके बीच वे ब्रह्मा के समान प्रतीत हो रहे थे।
 
Groups of Devas, Gandharvas and Apsaras surrounded him from all sides and started singing and dancing. He looked like Lord Brahma amongst them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)