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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 34: राजर्षि वृषदर्भ (या उशीनर)-के द्वारा शरणागत कपोतकी रक्षा तथा उस पुण्यके प्रभावसे अक्षयलोककी प्राप्ति
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श्लोक 31
श्लोक
13.34.31
अमृतेनावसिक्तश्च वृषदर्भो नरेश्वर:।
दिव्यैश्च सुसुखैर्माल्यैरभिवृष्ट: पुन: पुन:॥ ३१॥
अनुवाद
कुछ देवताओं ने राजा वृषदर्भ को अमृत से नहलाया और उन पर बार-बार दिव्य पुष्पों की वर्षा की, जो अत्यंत सुखदायक थे ॥31॥
Some demigods bathed King Vrishadharbha with nectar and repeatedly showered upon him divine flowers, which were extremely soothing. ॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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