Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.34.27-28: राजा ने जल्दी-जल्दी अपनी पसलियों, भुजाओं और जाँघों से मांस काटकर तराजू भरना शुरू कर दिया। हालाँकि, मांस की मात्रा कबूतर के मांस के बराबर नहीं थी। 27-28. | mahabharat अध्याय 13.34: राजर्षि वृषदर्भ (या उशीनर)-के द्वारा शरणागत कपोतकी रक्षा तथा उस पुण्यके प्रभावसे अक्षयलोककी प्राप्ति । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स राजा पार्श्वतश्चैव बाहुभ्यामूरुतश्च यत्॥ २७॥
तानि मांसानि संच्छिद्य तुलां पूरयतेऽशनै:।
तथापि न समस्तेन कपोतेन बभूव ह॥ २८॥
अनुवाद
राजा ने जल्दी-जल्दी अपनी पसलियों, भुजाओं और जाँघों से मांस काटकर तराजू भरना शुरू कर दिया। हालाँकि, मांस की मात्रा कबूतर के मांस के बराबर नहीं थी। 27-28.
The king began to quickly fill the scales by cutting flesh from his ribs, arms and thighs. However, the amount of flesh did not equal that of the pigeon. 27-28.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥