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mahabharat 13.34.26-27h: सम्पूर्ण श्वेत आकाश चारों ओर से बादलों से आच्छादित हो गया। उसके सत्य कर्मों के प्रभाव से पृथ्वी काँपने लगी।   |   mahabharat अध्याय 13.34: राजर्षि वृषदर्भ (या उशीनर)-के द्वारा शरणागत कपोतकी रक्षा तथा उस पुण्यके प्रभावसे अक्षयलोककी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 34: राजर्षि वृषदर्भ (या उशीनर)-के द्वारा शरणागत कपोतकी रक्षा तथा उस पुण्यके प्रभावसे अक्षयलोककी प्राप्ति  »  श्लोक 26-27h
 
 
श्लोक  13.34.26-27h 
निरुद्धं गगनं सर्वं शुभ्रं मेघै: समन्तत:॥ २६॥
मही प्रचलिता चासीत् तस्य सत्येन कर्मणा।
 
 
अनुवाद
सम्पूर्ण श्वेत आकाश चारों ओर से बादलों से आच्छादित हो गया। उसके सत्य कर्मों के प्रभाव से पृथ्वी काँपने लगी।
 
The entire white sky was covered with clouds from all sides. The earth began to tremble due to the effect of his true deeds. 26 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)