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mahabharat 13.34.21: मुझे वह भोजन मिलना चाहिए जो देवताओं ने अनादि काल से मेरे लिए निर्धारित किया है। लोग प्राचीन काल से जानते हैं कि चील कबूतरों को खाती है ॥21॥   |   mahabharat अध्याय 13.34: राजर्षि वृषदर्भ (या उशीनर)-के द्वारा शरणागत कपोतकी रक्षा तथा उस पुण्यके प्रभावसे अक्षयलोककी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 34: राजर्षि वृषदर्भ (या उशीनर)-के द्वारा शरणागत कपोतकी रक्षा तथा उस पुण्यके प्रभावसे अक्षयलोककी प्राप्ति  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  13.34.21 
यस्तु मे विहितो भक्ष्य: स्वयं देवै: सनातन:।
श्येना: कपोतान् खादन्ति स्थितिरेषा सनातनी॥ २१॥
 
 
अनुवाद
मुझे वह भोजन मिलना चाहिए जो देवताओं ने अनादि काल से मेरे लिए निर्धारित किया है। लोग प्राचीन काल से जानते हैं कि चील कबूतरों को खाती है ॥21॥
 
I should get the food that the gods themselves have prescribed for me since time immemorial. People have known since ancient times that eagles eat pigeons. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)