श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 34: राजर्षि वृषदर्भ (या उशीनर)-के द्वारा शरणागत कपोतकी रक्षा तथा उस पुण्यके प्रभावसे अक्षयलोककी प्राप्ति  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  13.34.20 
श्येन उवाच
न वराहं न चोक्षाणं न चान्यान् विविधान् द्विजान्।
भक्षयामि महाराज किमन्याद्येन तेन मे॥ २०॥
 
 
अनुवाद
बाज बोला, "महाराज! मैं सूअर, बैल या किसी भी अन्य पक्षी का मांस नहीं खाऊंगा। जो दूसरों का भोजन है, उसका मैं क्या करूंगा?"
 
The hawk said, "Maharaj! I will not eat the meat of a pig, a bull or any other kind of birds. What will I do with that which is food for others?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)