Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.33.9: हे प्रभु! मैं उन लोगों को नमस्कार करता हूँ जो भोजन करने से पहले देवताओं का पूजन करते हैं, मिथ्या अभिमान नहीं करते, संतुष्ट रहते हैं और क्षमाशील हैं॥9॥   |   mahabharat अध्याय 13.33: नारदजीके द्वारा पूजनीय पुरुषोंके लक्षण तथा उनके आदर-सत्कार और पूजनसे प्राप्त होनेवाले लाभका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 33: नारदजीके द्वारा पूजनीय पुरुषोंके लक्षण तथा उनके आदर-सत्कार और पूजनसे प्राप्त होनेवाले लाभका वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  13.33.9 
अभुक्त्वा देवकार्याणि कुर्वते येऽविकत्थना:।
संतुष्टाश्च क्षमायुक्तास्तान् नमस्याम्यहं विभो॥ ९॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! मैं उन लोगों को नमस्कार करता हूँ जो भोजन करने से पहले देवताओं का पूजन करते हैं, मिथ्या अभिमान नहीं करते, संतुष्ट रहते हैं और क्षमाशील हैं॥9॥
 
O Lord! I bow to those who worship the gods before eating, do not boast falsely, remain content and are forgiving.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)