श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 33: नारदजीके द्वारा पूजनीय पुरुषोंके लक्षण तथा उनके आदर-सत्कार और पूजनसे प्राप्त होनेवाले लाभका वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  13.33.8 
तपोधनान् वेदविदो नित्यं वेदपरायणान्।
महार्हान् वृष्णिशार्दूल सदा सम्पूजयाम्यहम्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे वृष्णिसिंह! मैं उन परम पूज्य पुरुषों की सदैव पूजा करता हूँ जिनका धन तपस्या है, जो वेदों को जानते हैं और जो वैदिक धर्म का पालन करते हैं।॥8॥
 
O Vrishnisingh! I always worship those most venerable men whose wealth is austerity, who know the Vedas and who follow the Vedic religion. ॥ 8॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd