| श्री महाभारत » पर्व 13: अनुशासन पर्व » अध्याय 33: नारदजीके द्वारा पूजनीय पुरुषोंके लक्षण तथा उनके आदर-सत्कार और पूजनसे प्राप्त होनेवाले लाभका वर्णन » श्लोक 6-7 |
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| | | | श्लोक 13.33.6-7  | वरुणं वायुमादित्यं पर्जन्यं जातवेदसम्।
स्थाणुं स्कन्दं तथा लक्ष्मीं विष्णुं ब्रह्माणमेव च॥ ६॥
वाचस्पतिं चन्द्रमसमप: पृथ्वीं सरस्वतीम्।
सततं ये नमस्यन्ति तान् नमस्याम्यहं विभो॥ ७॥ | | | | | | अनुवाद | | जो वरुण, वायु, आदित्य, पर्जन्य, अग्नि, रुद्र, भगवान कार्तिकेय, लक्ष्मी, विष्णु, ब्रह्मा, बृहस्पति, चंद्रमा, जल, पृथ्वी और सरस्वती को सदैव नमस्कार करते हैं, हे प्रभु! मैं उन पूजनीय पुरुषों को ही अपना मस्तक झुकाता हूँ। | | | | Those who always salute Varun, Vayu, Aditya, Parjanya, Agni, Rudra, Lord Kartikeya, Lakshmi, Vishnu, Brahma, Jupiter, Moon, Water, Earth and Saraswati, Lord! I bow my head only to those revered men. | | ✨ ai-generated | | |
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