श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 33: नारदजीके द्वारा पूजनीय पुरुषोंके लक्षण तथा उनके आदर-सत्कार और पूजनसे प्राप्त होनेवाले लाभका वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  13.33.5 
नारद उवाच
शृणु गोविन्द यानेतान् पूजयाम्यरिमर्दन।
त्वत्तोऽन्य: क: पुमाँल्लोके श्रोतुमेतदिहार्हति॥ ५॥
 
 
अनुवाद
नारद बोले, "शत्रुमर्दन गोविन्द! मैं जिनकी पूजा करता हूँ, उनका परिचय सुनने के लिए इस संसार में आपसे बढ़कर और कौन योग्य है?"
 
Narada said, "Shatrumardan Govind! Who else in this world is more deserving than you to hear the introduction of the one whom I worship?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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