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mahabharat 13.33.4: हे प्रभु! हे धर्मात्माओं में श्रेष्ठ नारद! वे कौन हैं जिनके प्रति आपके हृदय में महान श्रद्धा है और जिनके आगे आप सिर झुकाते हैं? यदि आप हमें बताना उचित समझें, तो कृपया हमें उन पूज्य पुरुषों से परिचित कराएँ।॥4॥   |   mahabharat अध्याय 13.33: नारदजीके द्वारा पूजनीय पुरुषोंके लक्षण तथा उनके आदर-सत्कार और पूजनसे प्राप्त होनेवाले लाभका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.33.4 
बहुमानपरस्तेषु भगवन् यान् नमस्यसि।
शक्यं चेच्छ्रोतुमस्माभिर्ब्रूह्येतद् धर्मवित्तम॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! हे धर्मात्माओं में श्रेष्ठ नारद! वे कौन हैं जिनके प्रति आपके हृदय में महान श्रद्धा है और जिनके आगे आप सिर झुकाते हैं? यदि आप हमें बताना उचित समझें, तो कृपया हमें उन पूज्य पुरुषों से परिचित कराएँ।॥4॥
 
Lord! O Narada, the best of the righteous! Who are those for whom you have great respect in your heart and in front of whom you bow your head? If you think it appropriate to tell us, please introduce us to those venerable men.'॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)