श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 33: नारदजीके द्वारा पूजनीय पुरुषोंके लक्षण तथा उनके आदर-सत्कार और पूजनसे प्राप्त होनेवाले लाभका वर्णन  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  13.33.35 
मातापित्रोर्गुरुषु च सम्यग् वर्तन्ति ये सदा।
यथा त्वं वृष्णिशार्दूलेत्युक्त्वैवं विरराम स:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
हे वृष्णिसिंह! जो लोग आपकी तरह माता-पिता और गुरु के प्रति न्यायपूर्वक आचरण करते हैं, वे भी संकटों पर विजय प्राप्त कर लेते हैं - ऐसा कहकर नारदजी चुप हो गए॥35॥
 
O Vrishni Singh! Those who, like you, behave justly towards their parents and Guru, also overcome the troubles - saying this, Narada became quiet. ॥ 35॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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