श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 33: नारदजीके द्वारा पूजनीय पुरुषोंके लक्षण तथा उनके आदर-सत्कार और पूजनसे प्राप्त होनेवाले लाभका वर्णन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  13.33.34 
अग्निमाधाय विधिवत् प्रणता धारयन्ति ये।
प्राप्ता: सोमाहुतिं चैव दुर्गाण्यतितरन्ति ते॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
जो लोग विधिपूर्वक अग्नि की स्थापना करते हैं, अग्निदेव की सदैव पूजा और प्रार्थना करते हैं, उसकी सदैव रक्षा करते हैं और उसमें सोमरस की आहुति देते हैं, वे सभी कठिन विपत्तियों को पार कर जाते हैं ॥ 34॥
 
Those who establish a fire in a proper manner, and who always worship and pray to the God of Fire, and who always protect it, and offer oblations of Soma juice into it, they cross all difficult calamities. ॥ 34॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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