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mahabharat 13.33.32: जो तपस्वी हैं, बाल्यकाल से ही ब्रह्मचारी हैं और तपस्या के द्वारा शुद्ध हृदय वाले हैं, वे कठिन से कठिन संकटों को पार कर जाते हैं ॥32॥   |   mahabharat अध्याय 13.33: नारदजीके द्वारा पूजनीय पुरुषोंके लक्षण तथा उनके आदर-सत्कार और पूजनसे प्राप्त होनेवाले लाभका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.33.32 
तपस्विनश्च ये नित्यं कौमारब्रह्मचारिण:।
तपसा भावितात्मानो दुर्गाण्यतितरन्ति ते॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
जो तपस्वी हैं, बाल्यकाल से ही ब्रह्मचारी हैं और तपस्या के द्वारा शुद्ध हृदय वाले हैं, वे कठिन से कठिन संकटों को पार कर जाते हैं ॥32॥
 
Those who are ascetics, celibate from childhood and have a pure heart through austerity, overcome difficult difficulties. ॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)