श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 33: नारदजीके द्वारा पूजनीय पुरुषोंके लक्षण तथा उनके आदर-सत्कार और पूजनसे प्राप्त होनेवाले लाभका वर्णन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  13.33.31 
तथैव विप्रप्रवरान् नमस्कृत्य यतव्रता:।
भवन्ति ये दानरता दुर्गाण्यतितरन्ति ते॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार जो मनुष्य नियमित रूप से व्रत रखते हैं और श्रेष्ठ ब्राह्मणों का आदर करते हैं तथा उन्हें दान देते हैं, वे कठिन से कठिन विपत्तियों पर विजय प्राप्त करते हैं ॥31॥
 
Similarly, those who observe fasts regularly and pay respects to the best of brahmins and give them alms, they overcome difficult calamities. ॥ 31॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd