श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 33: नारदजीके द्वारा पूजनीय पुरुषोंके लक्षण तथा उनके आदर-सत्कार और पूजनसे प्राप्त होनेवाले लाभका वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  13.33.3 
नारदं प्राञ्जलिं दृष्ट्वा पूजयानं द्विजर्षभान्।
केशव: परिपप्रच्छ भगवन् कान् नमस्यसि॥ ३॥
 
 
अनुवाद
एक समय देवर्षि नारदजी हाथ जोड़कर श्रेष्ठ ब्राह्मणों का पूजन कर रहे थे। यह देखकर भगवान श्रीकृष्ण ने पूछा - 'प्रभो! आप किसे प्रणाम कर रहे हैं?'॥3॥
 
Once upon a time, Devarshi Naradji was worshipping the best Brahmins with folded hands. Seeing this, Lord Krishna asked - 'Lord! Who are you saluting?॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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