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mahabharat 13.33.29: जो लोग सदैव अपने मन को वश में रखते हैं, किसी के दोष नहीं देखते और प्रतिदिन स्वाध्याय में लगे रहते हैं, वे कठिन से कठिन कठिनाइयों को भी पार कर जाते हैं ॥29॥   |   mahabharat अध्याय 13.33: नारदजीके द्वारा पूजनीय पुरुषोंके लक्षण तथा उनके आदर-सत्कार और पूजनसे प्राप्त होनेवाले लाभका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.33.29 
नित्यं शमपरा ये च तथा ये चानसूयका:।
नित्यस्वाध्यायिनो ये च दुर्गाण्यतितरन्ति ते॥ २९॥
 
 
अनुवाद
जो लोग सदैव अपने मन को वश में रखते हैं, किसी के दोष नहीं देखते और प्रतिदिन स्वाध्याय में लगे रहते हैं, वे कठिन से कठिन कठिनाइयों को भी पार कर जाते हैं ॥29॥
 
Those who always keep their mind under control, do not look at anyone's faults and remain engaged in self-study every day, they overcome even the most difficult difficulties. ॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)