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mahabharat 13.33.28: जो सबको अतिथि मानते हैं तथा गौ, ब्राह्मण और सत्य से प्रेम रखते हैं, वे बड़ी-बड़ी कठिनाइयों को भी पार कर जाते हैं। 28.   |   mahabharat अध्याय 13.33: नारदजीके द्वारा पूजनीय पुरुषोंके लक्षण तथा उनके आदर-सत्कार और पूजनसे प्राप्त होनेवाले लाभका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.33.28 
ये सर्वातिथयो नित्यं गोषु च ब्राह्मणेषु च।
नित्यं सत्ये चाभिरता दुर्गाण्यतितरन्ति ते॥ २८॥
 
 
अनुवाद
जो सबको अतिथि मानते हैं तथा गौ, ब्राह्मण और सत्य से प्रेम रखते हैं, वे बड़ी-बड़ी कठिनाइयों को भी पार कर जाते हैं। 28.
 
Those who treat everyone as guests and have love for cows, Brahmins and truth, cross even the biggest difficulties. 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)