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श्लोक 13.33.27  |
अस्मिल्ँलोके सदा ह्येते परत्र च सुखप्रदा:।
चरन्ते मान्यमाना वै प्रदास्यन्ति सुखं तव॥ २७॥ |
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| अनुवाद |
| ये ब्राह्मण इस लोक और परलोक में सदा सुख देते फिरते हैं। यदि इनका आदर किया जाए, तो ये तुम्हें अवश्य सुख देंगे॥27॥ |
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| These Brahmins always roam around giving happiness in this world and the next. If they are honored, they will surely give you happiness.॥ 27॥ |
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