श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 33: नारदजीके द्वारा पूजनीय पुरुषोंके लक्षण तथा उनके आदर-सत्कार और पूजनसे प्राप्त होनेवाले लाभका वर्णन  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  13.33.27 
अस्मिल्‍ँलोके सदा ह्येते परत्र च सुखप्रदा:।
चरन्ते मान्यमाना वै प्रदास्यन्ति सुखं तव॥ २७॥
 
 
अनुवाद
ये ब्राह्मण इस लोक और परलोक में सदा सुख देते फिरते हैं। यदि इनका आदर किया जाए, तो ये तुम्हें अवश्य सुख देंगे॥27॥
 
These Brahmins always roam around giving happiness in this world and the next. If they are honored, they will surely give you happiness.॥ 27॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd