श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 33: नारदजीके द्वारा पूजनीय पुरुषोंके लक्षण तथा उनके आदर-सत्कार और पूजनसे प्राप्त होनेवाले लाभका वर्णन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  13.33.26 
तस्मात् त्वमपि वार्ष्णेय द्विजान् पूजय नित्यदा।
पूजिता: पूजनार्हा हि सुखं दास्यन्ति तेऽनघ॥ २६॥
 
 
अनुवाद
वार्ष्णेय! इसलिए तुम्हें भी सदैव ब्राह्मणों का पूजन करना चाहिए। हे निष्पाप श्रीकृष्ण! वे पूजनीय ब्राह्मण तुम्हें आशीर्वाद देंगे॥ 26॥
 
Varshneya! Therefore you should also always worship Brahmins. Sinless Shri Krishna! Those worship-worthy Brahmins will bless you with their blessings.॥ 26॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd