श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 33: नारदजीके द्वारा पूजनीय पुरुषोंके लक्षण तथा उनके आदर-सत्कार और पूजनसे प्राप्त होनेवाले लाभका वर्णन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  13.33.22 
ब्राह्मणा: श्रुतसम्पन्ना ये त्रिवर्गमनुष्ठिता:।
अलोलुपा: पुण्यशीलास्तान् नमस्यामि केशव॥ २२॥
 
 
अनुवाद
केशव! मैं उन वेद-शास्त्रों के ज्ञान से युक्त, धर्म, अर्थ और काम के सुखों को भोगने वाले, लोभ से रहित और स्वभावतः गुणवान ब्राह्मणों को नमस्कार करता हूँ॥22॥
 
Keshav! I salute those Brahmins who are endowed with the knowledge of the Vedas and scriptures, who enjoy the pleasures of Dharma, Artha and Kama, who are devoid of greed and who are naturally virtuous. ॥22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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