श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 33: नारदजीके द्वारा पूजनीय पुरुषोंके लक्षण तथा उनके आदर-सत्कार और पूजनसे प्राप्त होनेवाले लाभका वर्णन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  13.33.21 
येषां त्रिवर्ग: कृत्येषु वर्तते नोपहीयते।
शिष्टाचारप्रवृत्ताश्च तान् नमस्याम्यहं सदा॥ २१॥
 
 
अनुवाद
जिनके कर्मों से धर्म, अर्थ और काम - तीनों पुरुषार्थ सिद्ध होते हैं, जो किसी को भी कष्ट नहीं पहुँचाते तथा जो सदा शिष्टाचार में लगे रहते हैं, उनको मैं नमस्कार करता हूँ। ॥21॥
 
I salute those whose activities fulfill all three aims - Dharma, Artha and Kama, who do not harm any one of them, and who are always engaged in etiquette. ॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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