श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 33: नारदजीके द्वारा पूजनीय पुरुषोंके लक्षण तथा उनके आदर-सत्कार और पूजनसे प्राप्त होनेवाले लाभका वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  13.33.16 
सुव्रता मुनयो ये च ब्राह्मणा: सत्यसंगरा:।
वोढारो हव्यकव्यानां तान् नमस्यामि यादव॥ १६॥
 
 
अनुवाद
यदुनन्दन! मैं उन ब्राह्मणों को सिर झुकाकर प्रणाम करता हूँ जो उत्तम व्रतों का पालन करते हैं, मननशील हैं, सत्य व्रत धारण करते हैं और नियमित रूप से हव्य-कव्य करते हैं। 16॥
 
Yadunandan! I bow my head to those Brahmins who observe good vows, are contemplative, have a vow of truth and perform Havya-Kavya regularly. 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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