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mahabharat 13.33.14: जो समस्त प्राणियों पर सदैव प्रसन्न रहते हैं और जो प्रातःकाल से मध्याह्न तक वेदों के अध्ययन में लगे रहते हैं, मैं उनकी पूजा करता हूँ ॥ 14॥   |   mahabharat अध्याय 13.33: नारदजीके द्वारा पूजनीय पुरुषोंके लक्षण तथा उनके आदर-सत्कार और पूजनसे प्राप्त होनेवाले लाभका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 33: नारदजीके द्वारा पूजनीय पुरुषोंके लक्षण तथा उनके आदर-सत्कार और पूजनसे प्राप्त होनेवाले लाभका वर्णन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  13.33.14 
प्रसन्नहृदयाश्चैव सर्वसत्त्वेषु नित्यश:।
आपृष्ठतापात् स्वाध्याये युक्तास्तान् पूजयाम्यहम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जो समस्त प्राणियों पर सदैव प्रसन्न रहते हैं और जो प्रातःकाल से मध्याह्न तक वेदों के अध्ययन में लगे रहते हैं, मैं उनकी पूजा करता हूँ ॥ 14॥
 
I worship him who is always pleased with all beings and who remains engaged in the study of the Vedas from morning till noon. ॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)