Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.33.12: जो अपने माता-पिता, परिवार के सदस्यों और सेवकों का भरण-पोषण करने में समर्थ हैं, जिन्होंने सदैव अतिथियों की सेवा करने का व्रत लिया है और जो केवल दिव्य यज्ञों से बचा हुआ अन्न ही खाते हैं, उनको मैं नमस्कार करता हूँ। ॥12॥ | mahabharat अध्याय 13.33: नारदजीके द्वारा पूजनीय पुरुषोंके लक्षण तथा उनके आदर-सत्कार और पूजनसे प्राप्त होनेवाले लाभका वर्णन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो अपने माता-पिता, परिवार के सदस्यों और सेवकों का भरण-पोषण करने में समर्थ हैं, जिन्होंने सदैव अतिथियों की सेवा करने का व्रत लिया है और जो केवल दिव्य यज्ञों से बचा हुआ अन्न ही खाते हैं, उनको मैं नमस्कार करता हूँ। ॥12॥
I bow before those who are capable of supporting their parents, family members and servants, who have taken a vow to always serve guests and who eat only the food left over from divine sacrifices. ॥12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥