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युधिष्ठिर उवाच
के पूज्या वै त्रिलोकेऽस्मिन् मानवा भरतर्षभ।
विस्तरेण तदाचक्ष्व न हि तृप्यामि कथ्यत:॥ १॥
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा- हे भरतश्रेष्ठ! इन तीनों लोकों में कौन-कौन लोग पूजनीय हैं? मुझे विस्तारपूर्वक बताइए। आपकी बातें सुनकर मुझे संतोष नहीं होता॥1॥
Yudhishthira asked- O best of the Bharatas! Which people are worship-worthy in these three worlds? Tell me this in detail. I do not get satisfied listening to your words.॥ 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥