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mahabharat 13.33.1: युधिष्ठिर ने पूछा- हे भरतश्रेष्ठ! इन तीनों लोकों में कौन-कौन लोग पूजनीय हैं? मुझे विस्तारपूर्वक बताइए। आपकी बातें सुनकर मुझे संतोष नहीं होता॥1॥   |   mahabharat अध्याय 13.33: नारदजीके द्वारा पूजनीय पुरुषोंके लक्षण तथा उनके आदर-सत्कार और पूजनसे प्राप्त होनेवाले लाभका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.33.1 
युधिष्ठिर उवाच
के पूज्या वै त्रिलोकेऽस्मिन् मानवा भरतर्षभ।
विस्तरेण तदाचक्ष्व न हि तृप्यामि कथ्यत:॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा- हे भरतश्रेष्ठ! इन तीनों लोकों में कौन-कौन लोग पूजनीय हैं? मुझे विस्तारपूर्वक बताइए। आपकी बातें सुनकर मुझे संतोष नहीं होता॥1॥
 
Yudhishthira asked- O best of the Bharatas! Which people are worship-worthy in these three worlds? Tell me this in detail. I do not get satisfied listening to your words.॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)