श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 32: वीतहव्यके पुत्रोंसे काशी-नरेशोंका घोर युद्ध, प्रतर्दनद्वारा उनका वध और राजा वीतहव्यको भृगुके कथनसे ब्राह्मणत्व प्राप्त होनेकी कथा  »  श्लोक 67
 
 
श्लोक  13.32.67 
तथैव कथितो वंशो मया गार्त्समदस्तव।
विस्तरेण महाराज किमन्यदनुपृच्छसि॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
महाराज! इसी प्रकार मैंने गृत्समद की वंशावली का भी विस्तार से वर्णन किया है। आप और क्या पूछ रहे हैं?
 
Maharaj! Similarly, I have described the lineage of Gritsamad in detail. What else are you asking?
 
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि वीतहव्योपाख्यानं नाम त्रिंशोऽध्याय:॥ ३०॥
इसप्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें वीतहव्यका उपाख्याननामक तीसवाँ अध्याय पूरा हुआ ॥ ३० ॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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